कलयुग की दहलीज, अज्ञान का रास्ता
बचपन से ही पढ़ने-सुनने में आता है – “अमुक विषय पर विद्वानों में मतभेद है।” बारंबार कही हुई बात सच लगने लगती है। ऐसा आभास होता है कि विद्वानों का काम अपने और दूसरों के ‘मत’ में ‘भेद’ करना ही होता है! फिर जब उम्र चुनाव में भाग लेने लायक हो जाती है, तब पता …